Uttar Pradesh Lucknow : दिल्ली की घटना से नहीं चेता लखनऊ आग के मुहाने पर खड़े शहर के बाजार व काम्प्लेक्स अवैध होटल, कॉप्लेक्सों की जांच नहीं दिखा कोई असर

मोहम्मद शानू

Lucknow Newsदिल्ली की घटना से नहीं चेता लखनऊ

लखनऊ। राजधानी में अवैध निर्माणों की तूती बोल रही है। बिल्डर से लेकर विभाग वाले भी शायद आंखें मूंदे हुए हैं। लगातार हो रही आग की घटनाओं से अवैध निर्माणों पर कोई असर नहीं दिख रहा लगातार हो रही आग की घटनाओं से अवैध निर्माणों पर कोई असर नहीं दिख रहा। दिल्ली की फैक्ट्री में लगी आग से 43 मजदूरों की मौत हो गई। चारबाग अग्निकांड में नौ लोग अपनी जान गवां चुके हैं। दिल्ली की तरह यहां भी कई घनी बस्तियों में मानकों के विपरीत कारखाने चल रहे हैं। शहर के पांच होटलों को फायर एनओसी न लेने के मामले में होटल कारोबारियों को नोटिस भेजी गई थी। फायर एनओसी न होने पर होटलों पर ताला लगाने के आदेश हुए थे। अधिकारी ने कहा था कि एनओसी के बिना होटलों का संचालन नहीं होने दिया जायेगा। होटल संचालकों के खिलाफ  फायर सीजीएम कोर्ट में मुकदमा भी दाखिल किया था। शासन, प्रशासन और एलडीए ने इन घटनाओं के बाद तेजी दिखायी और ऐसी सभी इमारतों, बाजारों व होटलों का सर्वे कर कार्रवाई करने के निर्देश जारी किये थे। मगर, अग्निकांड में मरने वालों की राख ठंडी होने के बाद कार्रवाई भी ठंडे बस्ते में डाल दी गई।

चारबाग के भीषण अग्निकांड हादसे के जिम्मेदारों को चार्जशीट दी गई। कार्रवाई किसी के खिलाफ नहीं हो सकी है। विगत वर्ष चारबाग के विराट होटल के बार में आग लगी थी। विकराल आग ने कई की जान ले ली थी। शहर में 1000 से ज्यादा छोटे बड़े होटल, रेस्टोरेंट व क्लब हैं जहां बार चलाने का लाइेंसस लिया गया है। मगर जिन स्थलों पर यह बार चल रहे हैं वो इमारत ही अवैध हैं। आबकारी विभाग से लाइसेंस वाले होटलों की सूची एलडीए को सौंपी गई थी। सचिव एमपी सिंह के निर्देश पर अभियंताओं ने इसकी जांच रिपोर्ट भी दी है। इसके अनुसार 90 फीसदी होटलों, रेस्टोरेंटों को पूर्णता प्रमाण पत्र जारी नहीं किया गया है। कमिश्नर ने एलडीए उपाध्यक्ष को पत्र लिखा है कि यह स्थिति पब्लिक सेफ्टी के लिहाज से उचित नहीं है। यही नहीं विधिक रूप से भी यह स्थिति उचित नहीं है। उन्होंने एलडीए से जांच के सामने आये तथ्यों को देखते हुए आवश्यक कार्रवाई कराने के निर्देश दिए थे। इसके अलावा शेष बचे 19 होटल, रेस्टोरेंट व क्लबों की भी जल्द से जांच कराकर कार्रवाई करने को कहा है। 96 स्थलों की जांच के लिए सूची दी गई थी इसमें से 77 होटलों, रेस्टोरेंट की जांच रिपोर्ट सौंपी गई। कमिश्नर ने डीएम को भी परीक्षण के बाद अपने स्तर से आबकारी आयुक्त व शासन को अवगत कराने को कहा है। बताते चले कि ऐसे 18 प्रमुख बाजार हैं जहां पर अगर आग लगती है तो फायर ब्रिगेड का वहां पहुंच पाना बहुत मुश्किल है। व्यापार मण्डल के मुताबिक पूरे लखनऊ में 50 हजार दुकानें हैं। यहियागंज और रकाबगंज बड़े और थोक व्यापारियों के बाजार हैं। 250 साल पुराने यहियागंज में लगभग 1350 दुकानें हैं। कई दुकानें बिना पंजीकरण के ही चल रही हैं। तंग गलियों में चल रही इस बाजार में हर दुकान में लाखों का माल भरा पड़ा है। अमीनाबाद क्षेत्र के यहियागंज, मुमताज मार्केट, प्रताप मार्केट, गणोशगंज, गड़बड़झाला, मुमताज मार्केट, मोहन मार्केट, मौलवीगंज, इंदिरा बाजार, मेडिसिन मार्केट, नाका, अम्बर मार्केट, चारबाग गुरूनानक मार्केट, नाजा मार्केट, हजरतगंज, महानगर करामत मार्केट तथा डंडइया बाजार आदि सकरी गलियों में चल रहे हैं। बिजली के तारों का मकडज़ाल है। यहियागंज में छह साल पहले आग लगी थी जो बड़ी दुर्घटना थी, अरबों रुपयों का नुकसान हुआ था। आग बुझाने की गाडिय़ां अन्दर नहीं जा पाई थीं।
अमीनाबाद की मुमताज मार्केट में अग्निकांड से सबक लेने के बाद तत्कालीन पुलिस महानिदेशक फायर सर्विस प्रवीण सिंह ने महत्वपूर्ण स्थानों, भवनों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में विद्युत सुरक्षा निदेशालय के माध्यम से इलेक्ट्रिक सेफ्टी का निरीक्षण करने के लिए सभी मंडलायुक्तों को पत्र लिखा था। फायर हाइड्रेंट और स्टेटिक टैंक की नियमित चेकिंग कराने और उसे क्रियाशील बनाने के निर्देश दिये गये थे। मुमताज मार्केट में आग लगने के बाद नगर निगम और एलडीए ने फाइल चलायी मगर कार्रवाई फाइलों में ही बंद होकर रह गई।

बताते चले कि 11 मई 2019 को नवीन गल्ला मण्डी में आग लगने से मजदूर की मौत, आठ दुकानें जलीं। 1 मई 2019 को इन्दिरानगर की गीत विहार कॉलोनी में चल रहे गैस चूल्हा गोदाम में आग लगने से पांच सदस्यों की मौत हुई थी। 7 जुलाई 2018 को चारबाग के दो होटलों में हुये अग्निकाण्ड में सात लोगों की मौत। 7 नवम्बर 2018 को नाका स्थित गोयल मोमबत्ती फैक्ट्री में आग चार दिन बाद काबू में आई। 27 नवम्बर 2017 को ऐशबाग स्थित कैलाश कोल्ड स्टोरेज में आग, तीन दिन तक धधकती रही। 27 नवम्बर 2011 को मौलवीगंज में बैग फैक्ट्री आग लगने से छह मजदूरों की मौत हो गयी। इतना सब होने के बाद भी कार्रवाई के नाम पर शायद सिर्फ फाइलों को दौड़ाया जा रहा है।

मार्केट में हाइड्रेंट सिस्टम लगना जरूरी

मुख्य शमन अधिकारी विजय कुमार सिंह की ओर से नगर निगम व जल संस्थान को लिखे गये पत्र के अनुसार बाजार में अग्नि सुरक्षा के लिए 1.5 लाख से 2 लाख लीटर क्षमता का भूमिगत टैंक बनाया जाना जरूरी है। इसका कनेक्शन 150 एमएम रिंग मेन से मुख्य मार्ग पर तथा सकरी गलियों में इससे कनेक्टेड 100 एमएम डायमीटर की रिंग मेन प्रत्येक मार्केट में लगाकर हाईड्रेंट सिस्टम स्थापित किया जाये। इसे प्रशराइज करने तथा 2280 लीटर प्रति मिनट क्षमता का एक विद्युत चालित पम्प एवं 180 लीटर प्रति मिनट क्षमता का जाकी पंप तथा 2280 लीटर प्रति मिनट क्षमता का एक डीजल पंप स्थापित किया जाय। यह अग्नि सुरक्षा व्यवस्था प्रत्येक 100 फायर हाईड्रेंट की दर से टैंक व पंप रूम एनबीसी मानक के अनुसार बने। सीएफओ ने उक्त बाजारों की महत्ता एवं संवेदनशीलता को देखते हुए अग्नि सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराने का सुझाव दिया, पर हुआ कुछ नहीं।

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