संपादकीय : विरासत में मिली राजनीति और राजनीति का लेथन

विरासत में मिली राजनीति और राजनीति का लेथन

संपादकीय।

मनोज श्रीवास्तव

राजनीति में पुत्रमोह , विरासत में
मिली राजनीति और कुपात्र को मिला विरासत का अंत हमेशा एक जैसा ही होता हैं । यह कहानी पांच हजार वर्ष से अभी तक चली आरही हैं , इसका गलत प्रभाव हमेशा देश, आम जनता या वह पार्टी ,वंश के खत्म होने पर ही शांत होती हैं।
आइये भारतवर्ष में झाक कर देखते हैं कब क्या, क्या हुआ ।
रामायण काल मे जब बड़े पुत्र राम के रहते ,कूटनीति के प्रयोग कर राम को वनवास और भरत को राजा बनाया गया । लेकिन वह भरत जैसा भाई था जिसने राम को उनकी सत्ता वापस कर दिया । महाभारत काल में राजसत्ता का असली हकदार पांडव युधिष्ठिर थे लेकिन धृतराष्ट्र ने पुत्रमोह के चक्कर में अपने पुत्र दर्योधन को राजा बनवाने के लिए , अपनी सत्ता भी गवाई और 100 पुत्रों को भी
मरना पड़ा। अब बात करले मोहम्मद साहब की उनके दामाद
अली को खलीफा होना था लेकिन बना कौन अब्बुबकर बन गए ।और जो पैग़ाम मो0 ने दिया था एक आल्हा एक किताब उसके बाद भी आज देखिये 72 फ़िरकाये और न जाने कितनी मान्यताएं ,जो मज़हब बना था शांति के लिए उसका हाल क्या है आप ख़ुद देखले। खैर अब बात करते है मुगलवंश की जहाँ दारा शिकोह को हिंदुस्तान का ताज पहनना था वही उसका छोटा भाई औरंगजेब ने अपने ही
बड़े भाई का क़त्ल कर ख़ुद बादशाह बन गया और वही से मुग़ल साम्राज्य का अंत की सुरुवात हो गई। चलिये अब पुरानी बातों को छोड़ दे, नई दौर की बात करते हैं ।अब बात करते हैं राहुल गांधी की , राहुल अच्छे हैं लेकिन राजनीति के लिए बिल्कुल उपयुक्त नहीं ।काँग्रेस का यह भी कारण है आगे न बढ़ने का वह गांधी परिवार के अलावा अन्य को देख भी नही सकते। चौधरी चरण सिंह जी कितने ग़द्दावर नेता थे लेकिन चौधरी अजीत सिंह , मुलायम सिंह यादव जी वही अखिलेश , वही पुराना राजनीतिक खेल आज शिवपालसिंह किनारे। यही हाल
बिहार में लालू प्रसाद यादव के पुत्रों का भी है आज पूरी पार्टी हाशिये पर । अब ज़रा बात कर लिया जाए शिवसेना की यह वह शिवसेना थी जिसके इसारे पर मुम्बई चलती थी कानून मंत्रालय
पर नही मातोश्री से बनता था सरकार किसी की भी हो सत्ता बाबा साहेब ठाकरे के पास होती थी । यह रुतबा रखने वाला शिवसेना भीगीं बिल्ली की तरह एक मुख्यमंत्री पद के लिए अपने
बाबा साहब ठाकरे के सिद्धांतों को तक मे बैठा दिया जो यह दुर्भाग्यपूर्ण निर्णय था ऊध्दय ठाकरे का हमको लगता हैं कि बाबा साहब ठाकरे जी से एक गलती हो वह भी पुत्रमोह में आकर, उन्होंने राज ठाकरे को नही बनाना आज शिवसेना का विचार मर गया है।
इसी लिए हमने कहा विरासत में मिली राजनीति और राजनीति का लेथन।

 

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