कोतवाली क्षेत्र के प्रमुख बाजारों में चल रहा है अवैध गांजा बेचने का व्यापार

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पकड़े जाने के बावजूद भी नहीं बंद हो पा रहा है क्षेत्र से अवैध व्यापार

बीकापुर_अयोध्या। कोतवाली बीकापुर क्षेत्र मे खाकी के संरक्षण में नशे का कारोबार खूब फल फूल रहा है। भांग की दुकानों के अलावा पान की दुकानों से भी खाकी के साये में गांजे की बिक्री चरम पर है। इससे युवा वर्ग बर्बादी के कगार पर पहुंच रहा है।सबसे बुरा हाल बीकापुर क्षेत्र का बताया जाता है। इस कोतवाली क्षेत्र में आधा दर्जन से अधिक स्थानों पर गांजे की बिक्री की जा रही है।
अवैध रूप से गांजा का व्यापार उनके आकाओं की कृपा दृष्टि एवं पुलिस प्रशासन के उदासीन कार्यप्रणाली के चलते क्षेत्र में बेरोकटोक फल फूल रहा है!
जिससे क्षेत्रीय ग्रामीण व स्कूल कॉलेज जाने वाले युवा नशे की गिरफ्त में आ रहे हैं । और अपना आर्थिक शारीरिक नुकसान पहुंचाते हुए सामाजिक रूप से तिरस्कृत किए जा रहे हैं.!
प्रशासन एवं संबंधित विभाग की उदासीनता के चलते नशे का व्यापार ग्रामीण क्षेत्रों में किराना दुकानों एवं पान की गुमटीओं पर खूब फल-फूल रहा है।
कोछा बाजार इस समय गांजा बिक्री का प्रमुख केंद्र बन गया है।
2 माह पूर्व कोतवाली पुलिस द्वारा मलेथू कनक रेलवे स्टेशन के पास इनायत नगर निवासी दो लोगों तथा एक पखवाड़े पूर्व चौरे बाजार से ही एक व्यक्ति को गांजा के साथ पकड़े जाने और जेल भेजे जाने से लोगों को या आस बंधी थी कि अब गांजा बिक्री करने वालों पर शिकंजा कसा जा रहा है और लोग इस नसे की गिरफ्त में आने से बच सकेंगे!
किंतु ग्रामीणों का यह ख्याल भी प्रशासन की ढील के चलते ख्याली ही साबित हुआ।
प्रशासन के औचक निरीक्षण के दावों के बावजूद भी बीकापुर क्षेत्र में चल रहा है अवैध गांजा बिक्री का व्यापार
क्षेत्र के चौरे बाजार तथा कोछा बाजार, खजुरहट, निधियावा, उमरपुर शेरपुर पारा आदि बाजारों में पान की गुमटीओं पर अवैध रूप से बिक रहे नशीले पदार्थों से जहां क्षेत्रीय युवा नशे की लत में पड़ रहे हैं ।
वही नशेड़ीओं की बढ़ती संख्या से आए दिन घरेलू हिंसा अपराध होने की संभावना बढ़ रही है । कोछा एवं चौरे बाजार क्षेत्र गांजा बेचने का प्रमुख केंद्र बन गया है”!
ग्रामीणों के बीच में चर्चा आम हो चुकी है कि कोतवाली क्षेत्र के प्रमुख बाजारों में संबंधित विभागों से मिलीभगत के चलते अवैध रूप से गांजा बेचने वाले पनवाड़ीयों के हौसले बुलंद हैं ।
▪एक ग्रामीण का कहना है 40 रुपए, 50 रुपए और ₹60 की दर से पुड़िया बनाकर गांजा की बिक्री की जाती है।
जागरूक प्रबुद्ध वर्ग का कहना है कि जब भी किसी क्षेत्र में जांच करने कोई टीम को आना होता है तो ऐसे अवैध कारोबारियों को “उनके सूत्रों” द्वारा पहले से ही सूचना मिल जाती है ।जिससे यह सतर्क हो सके और पकड़ में ना आए ।
प्रशासन की उदासीनता का आलम यह है कि गांजे के बिक्री करने वाले को पकड़ कर जुर्माना करने के बावजूद भी कुछ दुकानदार पुनः खुलेआम वही धंधा अभी भी कर रहे हैं। और क्षेत्रीय ग्रामीणों को नशे का आदी बना रहे हैं ।
इस संबंध में कोतवाली प्रभारी अश्वनी मिश्रा ने कहा कि ऐसे अवैध कारोबारियों की सूची तैयार कराई जा रही है,शीघ्र ही औचक निरीक्षण कर गांजा का अवैध व्यापार करने वालों पर विधिक कार्रवाई की जाएगी ।

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